ज़िद्दी बकरी – दोस्ती और समझदारी
ज़िद्दी बकरी — छोटी हिंदी कहानी: दो ज़िद्दी बकरियाँ और एक पतला पुल। बच्चों के लिए सहयोग पर कहानी।
एक पहाड़ी नदी पर एक बहुत पतला पुल था, जिस पर एक समय में सिर्फ़ एक ही जानवर चल सकता था। एक दिन दो बकरियाँ, एक इस तरफ़ से और एक उस तरफ़ से, पुल पर चढ़ गईं।
बीच में आकर दोनों आमने-सामने खड़ी हो गईं। “पीछे हटो, मुझे जाना है!” पहली बोली। “नहीं, तुम हटो, मैं पहले आई!” दूसरी बोली। दोनों सींग भिड़ाकर धक्का देने लगीं।
धक्का-मुक्की में दोनों का संतुलन बिगड़ा और दोनों छपाक से ठंडी नदी में गिर गईं। किसी तरह तैरकर वे किनारे पहुँचीं, भीगी और शर्मिंदा।
अगले दिन फिर दोनों पुल के बीच मिलीं। इस बार एक बकरी बैठ गई और दूसरी सावधानी से उसके ऊपर से कूदकर निकल गई। फिर पहली उठकर अपने रास्ते चली गई। दोनों मुस्कुराईं।
सीख (Moral of the Story)
ज़िद से नुकसान होता है; मिलकर रास्ता निकालना समझदारी है।
English Summary
Two stubborn goats meet in the middle of a narrow bridge and refuse to back down. They push with their horns until both fall into the cold river. The next day, one goat lies down so the other can step over her, and both cross happily.
शब्दावली (Vocabulary)
- बकरी (bakrī) – goat
- पुल (pul) – bridge
- ज़िद (zid) – stubbornness
- सींग (sīng) – horn
- नदी (nadī) – river
- संतुलन (santulan) – balance
Image: Basile Morin / Wikimedia Commons, CC BY-SA 4.0
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