दिवाली का दीया – त्योहार की कहानी
दिवाली का दीया — बच्चों के लिए दिवाली की हिंदी कहानी: एक छोटा दीया जो अँधेरी गली को रोशन करता है।
दिवाली की रात थी। सब घर रोशनी से जगमगा रहे थे। एक कुम्हार की दुकान में एक छोटा-सा मिट्टी का दीया बचा रह गया था, जिसे कोई नहीं ले गया था।
“मैं इतना छोटा हूँ, मुझसे कौन रोशनी करवाएगा?” दीया उदास होकर सोच रहा था। तभी एक छोटी लड़की, गौरी, अपनी माँ के साथ आई और बोली, “माँ, यह दीया मुझे चाहिए।”
गौरी ने देखा कि उनकी गली के आख़िरी घर में अँधेरा था। वहाँ एक बूढ़ी अम्मा अकेली रहती थीं। गौरी ने वह दीया तेल और बाती से भरकर जलाया और अम्मा के दरवाज़े पर रख दिया।
छोटे दीये की रोशनी से अम्मा का चेहरा खिल उठा। उन्होंने गौरी को मिठाई दी और आशीर्वाद दिया। उस रात दीया समझ गया कि रोशनी छोटी हो या बड़ी, किसी का दिल रोशन कर सकती है।
सीख (Moral of the Story)
छोटी-सी भलाई भी किसी की ज़िंदगी में उजाला ला सकती है।
English Summary
On Diwali night, a tiny clay lamp left unsold in a potter’s shop feels too small to matter. A girl named Gauri buys it, lights it and places it at the dark doorway of a lonely elderly neighbor, whose face lights up. Even a small light can brighten someone’s heart.
शब्दावली (Vocabulary)
- दिवाली (divālī) – Diwali, festival of lights
- दीया (dīyā) – clay lamp
- कुम्हार (kumhār) – potter
- रोशनी (roshnī) – light
- मिठाई (miṭhāī) – sweets
- आशीर्वाद (āshīrvād) – blessing
Image: Smita Barua setu / Wikimedia Commons, CC BY 4.0
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